G News 24 : देश का 61 फीसदी हिस्सा पूरी तरह से प्राकतिक आपदा की जद में,सरकार ने भी माना !

 आधा नहीं अब 61 फीसदी भारत आपदा की जद में...

 देश का 61 फीसदी हिस्सा पूरी तरह से प्राकतिक आपदा की जद में,सरकार ने भी माना !

देश का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह से प्राकतिक आपदा की जद में आ चुका है. भारत सरकार ने खुद इसकी स्वीकारोक्ति को कबूल करते हुए नया अलर्ट जारी किया है. भारत का ये खूबसरत हिस्सा ऐसे 'नेचर बम' के रूप में तब्दील हो चुका है, जिसके फटने पर महाविनाश तय है.

मौसम विभाग (IMD) हो या पृथ्वी और विज्ञान मंत्रालय दोनों प्राकतिक आपदाओं का सटीक अध्यन करते रहते हैं. कई अन्य विभाग की इसमें अपना इनपुट देते हैं. नवाचार हो या पुराने तरीके हर एक्सपर्ट और वैज्ञानिकों का मकसद समय रहते ऐसा इनपुट देने पर है, जिससे कुदरत की 'विनाशलीला' जैसे हालात बनने पर बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान को रोका जा सके. ऐसी तमाम कोशिशों और कामयाबियों के बीच वैज्ञानिकों ने एक चिंताजनक इनपुट जारी किया है. 

'पूरा इलाका अब खतरे की जद में'

भारतीय वैज्ञानिकों ने भूकंप डिजाइन कोड के तहत नया सिस्मिक अर्थक्वेक मैप जारी किया है. जिसमें पूरे हिमालयन कर्व को पहली बार नए शुरू किए गए उच्चतम-जोखिम वाले जोन VI में रखा गया है. नए भूकंपनीय नक्शे से पता चलता है कि अब आधा भारत नहीं बल्कि देश का 61 फीसदी हिस्सा अब मीडियम से हाई डेंजर जोन में बदल चुका है. ये बदलाव तमाम जिम्मेदार संस्थानों और निकायों को सलाह नहीं बल्कि ये चेतावनी देते हैं कि इस बड़े खतर से निपटने के लिए उनकी क्या तैयारियां हैं. भविष्य के निर्माण कैसे हों और पुराना इंफ्रास्ट्रक्टर क्या इस लायक है जो इस महाद्वीप के सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों के नीचे लगातार हो रही भूगर्भीय हलचलों से निकलने वाली ऊर्जा का सामना कर सकते हैं.

क्वियर हुआ कॉन्सेप्ट 

टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के डायरेक्टर और नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के पूर्व डायरेक्टर विनीत गहलोत ने बताया है कि नक्शे में बदलाव से अब हिमालयन बेल्ट में एकरूपता आई है, क्योंकि कई इलाके जो अधिक संवेदनशील थे वो भूकंप के खतरे के लिहाज से जोन IV और V में बंटे थे लेकिन नए नक्शे में वो अति संवेदनशील जोन VI में आ गए हैं.

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