बुधवार दोपहर करीब ढाई बजे शॉर्ट सर्किट से...
कमलाराजा हॉस्पिटल के सिक न्यूबोर्न केयर यूनिट में अचानक लगी आग !
ग्वालियर। जिले के कमलाराजा हॉस्पिटल के सिक न्यूबोर्न केयर यूनिट में बुधवार दोपहर करीब ढाई बजे शॉर्ट सर्किट से बिजली के बाेर्ड में अचानक आग लग गई। आग फैलती इससे पहले डॉक्टरों की निगाह उस पर पड़ गई और उन्होंने बिना देर लगाए सीजफायर से आग पर काबू पा लिया। आग बुझते पीआईसीयू में धुंआ होने लगा जिसे देखकर वहां भर्ती नवजात शिशुओं को नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों ने एसएनसीयू के दूसरे हिस्से में शिफ्ट कर दिया। 10 बच्चों को चौथी मंजिल पर बने वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।
केआरएच के एसएनसीयू और पीआईसीयू में क्षमता से अधिक बच्चे भर्ती रहते हैं। 30 वार्मर वाले एसएनसीयू में बुधवार को 68 नवजात शिशु भर्ती थे। धुंआ उठते ही जूनियर डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ 10 बच्चों को तीसरी मंजिल स्थित वार्ड में लेकर पहुंचे। अधीक्षक डॉ. आरकेएस धाकड़ भी पहुंच गए। इसी बीच जिला अस्पताल के एसएनसीयू के डॉक्टरों से भी अपने यहां व्यवस्था रखने को कहा। एसएनसीयू के दूसरे कमरे में अभी भी 58 नवजात शिशु भर्ती हैं।
एसएनसीयू में शॉर्ट सर्किट से आग लगी थी इसी बीच दो नवजात शिशु भर्ती होने आए जिन्हें मुरार एसएनसीयू शिफ्ट कर दिया गया।इसके साथ ही डॉक्टरों ने पहले तो कुछ नवजातों को मुरार शिफ्ट करने का निर्णय लिया,लेकिन बाद में बच्चों की स्थिति देखते हुए उन्हें जनरल वार्ड में पहुंचाया गया। जिला अस्पताल के एसएनसीयू के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राम बंसल ने बताया कि केआरएच से पांच बच्चों को शिफ्ट करने की सूचना आई थी, लेकिन बाद में बच्चों को शिफ्ट नहीं किया गया।
हालांकि दो ऐसे नवजात जो भर्ती होने के लिए कमलाराजा पहुंचे थे, उन्हें सीधा जिला अस्पताल ही भेज दिया गया। सिगौरा के बसीम हुसैन ने बताया कि एक माह एक दिन का बच्चा है। डॉक्टरों ने आग लगने के बाद डॉक्टरों ने उसे यहां लाकर भर्ती किया है। ग्वालियर के दशरथ ने बताया कि आग पर तो तुरंत काबू पा लिया था लेकिन धुआं हो गया था। डॉक्टर गोद में उनका बच्चा लेकर आए और वह उनके पीछे थे। बच्चे को यहां भर्ती कराया है।
एसएनसीयू के एक बोर्ड में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी, उस आग पर तत्काल काबू पा लिया गया। एहतियात के तौर के तौर बच्चों को एसएनसीयू के बगल के कमरे में शिफ्ट कर दिया। जो बच्चे ठीक थे,उन्हें उनकी मां के पास वार्ड में भर्ती करा दिया गया है - डॉ. आरकेएस धाकड़, अधीक्षक, जेएएच










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