नौ दिनों तक कोई खुशी नहीं मनाएगा सिख समाज...

छोटे साहिबजादों की शहादत को नमन

मुगलिया हुकूमत के जुल्मों सितम के खिलाफ लड़ते हुए अपने प्राण न्योछावर करने वाले गुरु गोबिंद सिंह के चारों साहिबजादों और दादी माता गुजर कौर की शहादत को गोरखपुर के सिख समाज के लोग भी नमन करेंगे।
20-29 दिसंबर तक जटाशंकर गुरुद्वारा की ओर से शहीदी सप्ताह का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान लोगों को सिख समाज के स्वर्णिम इतिहास से रूबरू कराया जाएगा। नौ दिनों तक सिख समाज कोई खुशी नहीं मनाएगा। सादा खानपान के साथ वैरागी जीवन व्यतीत करेगा।
 जटाशंकर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष जसपाल सिंह ने बताया कि शहीदी सप्ताह की तैयारियां शुरू हो गई हैं। हिंदू धर्म की रक्षा के लिए गुरु तेगबहादुर ने अपना बलिदान दिया। उन्हीं के पदचिह्नों पर चलते हुए भारत की आन-बान और शान के लिए चारों साहिबजादों बाबा अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह, फतेह सिंह और उनकी दादी माता गुजर कौर ने अपना बलिदान दिया।

अजीत सिंह और जुझार सिंह मुगलों के साथ युद्ध करते शहीद हुए। उन्होंने गुरुवाणी की पंक्ति ‘सूरा सो पहचानिए, जो लरै दीन के हेत, पुरजा-पुरजा कट मरै, कबहू ना छाडे खेत’ को सच किया। जोरावर सिंह और फतेह सिंह को इस्लाम कबूल नहीं करने की वजह से जिंदा दीवार में चुनवा दिया।
उनकी दादी मां गुजर कौर को किले के ऊंचे बुर्ज से धक्का देकर शहीद कर दिया गया। इस तरह देश और धर्म की रक्षा में गुरु गोबिंद सिंह महाराज का सारा परिवार शहीद कर दिया गया। सिख समाज इन महान शहीदों के महान बलिदान के सामने नतमस्तक होते हुए कोई खुशी नहीं मनाता है। शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में जटाशंकर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से 20-29 दिसंबर तक कीर्तन और लंगर का आयोजन होगा।

पंजाबी अकादमी के सदस्य जगनैन सिंह नीटू ने बताया कि चार साहिबजादों की याद में ‘सफर-ए-शहादत’ जुलूस का आयोजन किया जाएगा। इसके अंतर्गत 51 चार पहिया वाहनों में सवार होकर सिख समाज के लोग जुलूस की शक्ल में जटाशंकर गुरुद्वारा से धर्मशाला, यातायात चौराहा, काली मंदिर, इंदिरा तिराहा, शास्त्रीचौक, आंबेडकर चौक होते हुए छात्रसंघ चौराहे पर पहुंचेंगे। वहां से गुरु का सिमरन करते हुए पैदल ही सिख समाज के लोगों का हुजूम पैडलेगंज स्थित गुरुद्वारा में जाएगा।  
शहीदी दिवस के अंतर्गत गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, पैडलेगंज में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन होगा। सुबह सुखमनी साहिब का पाठ होगा।लोकल जत्थेदार की ओर से कीर्तन किया जाएगा। आकर्षण का केंद्र पटियाला से आए कथा वाचक सुच्चा सिंह की ओर की गई अरदास होगी। आखिर में लंगर के साथ शहीदी दिवस का समापन होगा।

 ‘निक्कियां जिंदा, वड्डा साका’ गुरु गोबिंद सिंह के छोटे साहिबजादों की शहादत को जब याद किया जाता है तो सिख संगत के मुख से यह लफ्ज ही बयां होते हैं। इंसानियत की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले चारों साहिबजादों की याद में शहीदी दिवस का आयोजन किया जाएगा। जटाशंकर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से तैयारियां की जा रही हैं - जगनैन सिंह नीटू, सदस्य पंजाबी अकादमी और मीडिया प्रभारी जटाशंकर गुरुद्वारा