नाजुक वित्तीय स्थिति के चलते…

प्रदेश की अर्थव्यवस्था की हालत हुई खस्ता,कई महत्वपूर्ण कार्य रुके

प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों पर वोटिंग के बाद प्रदेश की शिवराज सरकार वित्तीय प्रबंधन में जुट गई है. राज्य सरकार ने लोक निर्माण विभाग, जल संसाधन विभाग सहित आठ विभागों को ही बजट की स्वीकृत राशि खर्च करने की अनुमति दी है. इसके अलावा शेष 46 विभाग स्वीकृत बजट का दस फीसदी से ज्यादा खर्च नहीं कर सकेंगे. नाजुक वित्तीय स्थिति के चलते राज्य सरकार को लगातार कर्जा लेना पड़ रहा है. 

हालात यह हैं कि सरकार को कर्मचारियों के वेतन बांटने तक के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है. पिछले 30 दिनों में प्रदेश सरकार चार बार बाजार से कर्जा ले चुकी है, इसके बाद सरकार पर जनवरी से अब तक 22 हजार करोड़ का कर्जा बढ़ गया है. शिवराज सरकार सात माह के कार्यकाल में 10 बार कर्ज ले चुकी है. 

राज्य सरकार पर दो लाख 28 हजार करोड़ का कर्ज पहले से ही सिर पर है. इसमें एक लाख 15 हजार 532 करोड़ रुपए बाजार से, सात हजार 360 करोड़ बाॅन्ड्स से, 10 हजार 766 करोड़ वित्तीय संस्थाओं से 20 हजार 938 करोड़ केंद्र सरकार से एडवांस और लोन के रूप में लिया गया है।