JU में  राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर वेबीनार संपन्न...

शिक्षक साधारण बालक को भी सम्राट बना सकता है : आचार्य पचौरी

ग्वालियर। शिक्षक सामान्य से बालक को भी सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य बना सकता है, बिना किसी विशेष संसाधनों के स्वामी रामकृष्ण  परमहंस विवेकानंद को  गढ़ते हैं। समाज के उत्थान में शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका है, शिक्षक ही है जो देव मानवों का निर्माण करता है। उक्त विचार भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय महामंत्री आचार्य उमाशंकर पचौरी ने जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर द्वारा नीति आयोग और भारतीय शिक्षण मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित वेबीनार में व्यक्त किए। वेबिनार का विषय राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में शिक्षकों की भूमिका रखा गया था। सर्वप्रथम शिक्षण मंडल की परंपरा अनुसार धेय मंत्र से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। अतिथि परिचय मध्य भारत प्रांत के प्रांत उपाध्यक्ष प्रो संदीप कुलश्रेष्ठ ने तथा विषय की रूपरेखा  कुलाधि सचिव प्रोफ़ेसर उमेश होलानी ने प्रस्तुत की। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं विश्वविद्यालय की यशस्वी कुलपति प्रोफेसर  संगीता शुक्ला ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के महत्व का प्रतिपादन करते हुए इसके क्रियान्वयन में शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने माना कि विश्व विद्यालय शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है तथापि सभी कमियों को दूर करते हुए हमें आगे बढ़ना है ,और शिक्षक और शिक्षण दोनों की गुणवत्ता में सुधार हेतु प्रभावी कदम उठाना है। आचार्य पचौरी ने अपने उद्बोधन में  आगे राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए उसे गुरुजनों का दायित्व बताया। उन्होंने कहा कि गुरु पारखी और दृष्टा होता है। विश्वामित्र ने यज्ञ की रक्षा के लिए राजा दशरथ की सेना न लेकर केवल दो राजकुमारों में विश्वास व्यक्त किया। जब गुरु ,शिष्य में विश्वास व्यक्त करता है तब दशरथ नंदन राम ,मर्यादा पुरुषोत्तम राम बन जाते हैं। 

भारतीय शिक्षण मंडल इस देश के समस्त गुरुओं  को चाणक्य के समान बनने का आह्वान करता है , तभी समाज में देव मानवों का प्रतिशत बढ़ेगा और तब यह देश एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में विश्व पटल पर आलोकित होगा। अपने वक्तव्य के अंत में आचार्य पचौरी ने कहा कि इस देश में एक करोड़ शिक्षक हैं और 33 करोड़ विद्यार्थी एक शिक्षक मात्र 33 विद्यार्थियों को देव मानव अर्थात श्रेष्ठ इंसान बना दे , तो देश में 33 करोड़ देव मानव होंगे। हम सब के पास यह अवसर है ,राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से , इसके प्रभावी क्रियान्वयन में अपना योगदान  दें और  इस ज्ञान यज्ञ में सम्मिलित हो कर  अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें , अन्यथा आने वाली पीढ़ियां हम से पूछेगी कि जब शिक्षा नीति का क्रियान्वयन हो रहा था तब आप क्या कर रहे थे, और कहां थे। आप सब जेस्ट और श्रेष्ठ विद्वानों से नीति के क्रियान्वयन में योगदान की आशा और अपेक्षा के साथ अपनी वाणी को विराम देता हूं। 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर पूर्व कुलाधिसचिव प्रोफेसर  डीडी अग्रवाल, प्रो डीसी तिवारी ,प्रो ए के जैन आदि विद्वानों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। दिव्य  ध्येय की ओर तपस्वी जीवन भर बढ़ता जाता है , गीत की प्रस्तुति मध्य भारत प्रांत के सह गुरुकुल प्रमुख पीयूष ताम्बे ने दी। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो  आनंद मिश्र, कार्य परिषद सदस्य वीरेंद्र गुर्जर ,प्रोफेसर डीसी गुप्ता , प्रो एके श्रीवास्तव प्रो हेमंत शर्मा ,प्रोफेसर एस के सिंह एवं ग्वालियर ,शिवपुरी, गुना, दतिया ,भिंड ,मुरैना एवं श्योपुर जिलों के महाविद्यालयों के प्राचार्य एवं अन्य प्राध्यापक गण जुड़े। कार्यक्रम का संचालन वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष एवं मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के  क्षेत्रीय निर्देशक प्रो महेंद्र कुमार गुप्ता ने एवं आभार भारतीय शिक्षण हूँ मंडल ,मध्य भारत, प्रांत मंत्री डॉ शिवकुमार शर्मा ने व्यक्त किया, तथा प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।