कहीं लॉकडाउन, कहीं कर्फ्यू, कई देशों में अस्पताल फुल…

ज्यादा खतरनाक होकर लौटा कोरोना !

कोविड ट्रैकिंग प्रोजेक्ट के अनुसार शनिवार को अमेरिका में 83,227 लोग अस्पताल में भर्ती हुए. लगातार 12वें दिन अमेरिका ने अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या का एक नया रिकॉर्ड बनाया है. कोरोना की दूसरी लहर ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है. इनमें सबसे बुरा हाल अमेरिका का है. सिर्फ नवंबर में ही अमेरिका में कोरोना के एक महीने में सबसे ज्यादा केस सामने आ चुके हैं जबकि नवंबर  अभी खत्म भी नहीं हुआ है. यूरोपियन देश भी हालातों से निपटने के लिए लॉकडाउन जैसे फैसले लेने को मजबूर हो रहे हैं. भारत में भी केंद्र और राज्य सरकारें आपात बैठकें कर रही हैं. जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के अनुसार अमेरिका में 1 से 22 नवंबर के बीच 3 मिलियन से ज्यादा केस दर्ज किए जा चुके हैं. ये आंकड़ा अमेरिका में अब तक के कुल कोरोना मामलों का चौथाई है. यूनिवर्सिटी के डेटा के अनुसार पिछले हफ्ते रोज सामने आने वाले मामलों की संख्या में बीते हफ्तों की तुलना में 25 फीसदी का इजाफा हुआ. 

वहीं जांच सिर्फ 14.55 फीसदी बढ़ी है. 44 राज्यों में पॉजिटिविटी रेट रिकमेंडेड 5 फीसदी से ज्यादा है. कोरोना के लगातार बढ़ते मरीजों का असर अमेरिका के अस्पतालों पर पड़ रहा है. कोरोना मरीजों की संख्या में इजाफे से हेल्थ केयर सिस्टम दबाव में है और इससे आम मरीज खतरा महसूस कर रहे हैं. कोविड ट्रैकिंग प्रोजेक्ट के अनुसार शनिवार को अमेरिका में 83,227 लोग अस्पताल में भर्ती कराए गए. लगातार 12वें दिन अमेरिका ने अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या का एक नया रिकॉर्ड बनाया. अमेरिका के 24 अस्पतालों ने स्टाफ की कमी को लेकर अमेरिकन हॉस्पिटल एसोसिएशन को चेताया है. हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले दिनों में छुट्टियों और ठंड के चलते संक्रमण, मरीज और मौत के हालात और खराब हो सकते हैं. हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी अनुसार अमेरिका में अब तक 12.2 मिलियन से ज्यादा लोग इस वायरस से संक्रमित हो चुके हैं और 256,000 से ज्यादा लोगों की इससे जान जा चुकी है. 

वहीं कुछ दिन पहले अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा था कि अमेरिका में लॉकडाउन जैसी स्थिति उन्हें नहीं लग रही. वो सभी के मास्क अनिवार्य करने के लिए गवर्नरों के साथ चर्चा कर रहे हैं. दूसरी ओर कोरोना यूरोपियन देशों को भी अपनी चपेट में ले चुका है. अस्पतालों में मरीजों का दबाव बढ़ता जा रहा है. संक्रमण से होने वाली मौतों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है. कई देश अपने यहां लॉकडाउन लगा चुके हैं तो कई ने कड़े प्रतिबंध राज्यों में लागू कर दिए हैं. कोरोना से सबसे बुरे हालात चेक, बेल्जियम, फ्रांस, जर्मनी, इटली जैसे देशों में हैं.बेल्जियम हेल्थ अथॉरिटी ने 9 नवंबर को कहा था कि कोरोना की दूसरी लहर में देश के अस्पतालों में अब तक के सबसे ज्यादा मरीज भर्ती हुए हैं. यही कारण है कि अक्टूबर के अंत में लॉकडाउन लगाना पड़ा. करीब 11 मिलियन की आबादी वाले देश बेल्जिम में हर रोज औसतन 185 लोगों की मौत हो रही है. 

वहीं औसतन 406 लोग हर रोज अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं. अभी तक यहां 504,000 कुल मामले और 14,839 लोगों की मौत हो चुकी है. जर्मनी में लोग कोरोना प्रतिबंधों के खिलाफ सड़कों पर उतर चुके हैं. लोगों ने मास्क लगाने और सोशल डिस्टेंसिंग का विरोध किया तो पुलिस ने पानी की बौछारों से उन्हें तितर-बितर किया. जर्मनी में अभी तक 932,000 कुल मामले और 14,159 लोगों की मौत हो चुकी है. ब्रिटेन में कोरोना से हुईं कुल मौतों में चौथाई हिस्सा सिर्फ जर्मनी का है. बीते मंगलवार को इटली में दूसरी लहर में अब तक की सबसे ज्यादा मौत की संख्या दर्ज की गई. कोरोना से एक दिन में 731 लोगों ने दम तोड़ दिया. पश्चिमी देशों में कोरोना ने सबसे पहले इटली को अपनी चपेट में लिया था. अब तक यहां 46,464 लोगों की मौत हो चुकी है. कोरोना को काबू में करने के लिए हाल ही में जर्मनी ने चार राज्यों में लॉकडाउन और पूरे देश में कर्फ्यू लगाने का फैसला किया है.