अगर आप भी हैं आधार कार्ड धारक तो जरूर पढ़ें यह खबर…
आम आदमी का अधिकार आधार

भारतीय विशिष्ट पहचान पत्र जो यूनिक आईडी के नाम से भी जाना जाता है, इस पहचान पत्र के बारे में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधीकरण यह दावा करता है कि यह दस्तावेज पूरी तरह सुरक्षित है और इसकी डुप्लीकेसी नहीं की जा सकती है। प्राधीकरण का यह भी कहना है कि किसी भी व्यक्ति का आधार कार्ड केवल एक ही बार बन सकता है और इसका आइडेन्टीफिकेशन  नम्बर भी एक ही बार जारी किया जाता है हालांकी व्यक्ति की जानकारी, मसलन उसकी आयु, पता, मोबाइल नंबर, नाम में आंशिक परिवर्तन आदि किया जा सकता है, लेकिन उसका आइडेन्टीफिकेशन  नम्बर नहीं बदलता। 

ल्ेकिन हम आपको जो खबर बताने जा रहे हैं वह ठीक इसके विपरीत है। यहाँ हम बात कर रहे हैं। राजेन्द्र सिंह सेंगर की जिन्होंने अपने आधार में कुछ आंशिक सुधार के लिए आधार केन्द्र पर आवेदन किया उसके बाद उनकी आईरिस व फिंगरप्रिंट लिये जाने के बाद आधार में परिवर्तन तो हुआ लेकिन इसके साथ ही न सिर्फ उसमें आंशिक परिवर्तन हुआ बल्कि उनका आधार नंबर ही बदल गया। 

अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधीकरण का आधार के बारे में पूरी तरह सुरक्षित होने के दावे का क्या ? क्योंकि आप और हम सभी जानते हैं कि किसाी व्यक्ति की आईरिस व फिंगरप्रिंट बदले नहीं जा सकते और जब यह बदले नहीं जा सकते तो किसी भी व्यक्ति का दूसरा आधार कार्ड कैसे बन सकता है ? वह भी नये आइडेन्टीफिकेशन  नम्बर के साथ। इस प्रकार के कृत्य से तो यही लगता है कि जब एक पुराने आइडेन्टीफिकेशन नम्बर की जगह पर नया नंबर जनरेट हो सकता है तो गराबों के नाम पर चल रहीं आधार से लिंक्ड तमाम सरकारी योजनाओं को चपत भी लगाई जा सकती है।

प्राधीकरण की इस लापरवाही के कारण राजेन्द्र को अब तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने जहाँ पहले मिले आधार नंबर का उपयोग किया था, वह आधार अब आइडेन्टीफाय नहीं हो रहा है इसके चलते अनेक सुविधाओं से श्री सेंगर वंचित हो गये हैं और नये जनरेट हुए आधार को यह संस्थाऐं स्वीकार करने में आनाकानी कर रहीं हैं। ऐसे में श्री सेंगर का पी-एफ- भी अटक गया है] जिसको लेकर वह काफी परेशान हैं।