मुश्किल लग रही राज्यसभा सीट पर बरैया को उतारा गया है…

कांग्रेसियों को दरकिनार कर दलित नेता फूलसिंह बरैया को टिकट


ग्वालियर l ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत की तात्कालिक वजह राज्यसभा टिकट की दावेदारी को माना जा रहा है, ऐसे में कई दिग्गज कांग्रेसियों को दरकिनार कर दलित नेता फूलसिंह बरैया को टिकट देने के पीछे ग्वालियर-चंबल अंचल के जातिगत गणित को बताया जा रहा है।

बदले सियासी घटनाक्रम में मुरैना की जौरा विधानसभा के साथ बागी विधायकों की सीट पर भी उपचुनाव हो सकते हैं। इनमें भिंड-मुरैना, दतिया-शिवपुरी की छह सीटें आरक्षित हैं और यहां बरैया एक चिरपरिचित चेहरा है। ऐसे में सिंधिया के भाजपा में जाने के बाद बरैया को यूं तरजीह देने से कांग्रेस के लिए कुछ हद तक "डैमेज कंट्रोल" हो सकता है।

बागी विधायकों की सीटों का गणित ऐसे समझें : जो 22 विधायक अभी बेंगलुरु में डटे हैं, उनमें 15 ग्वालियर-चंबल अंचल के हैं। इन विधायकों की ग्वालियर, ग्वालियर पूर्व, मुरैना, सुमावली, दिमनी, पोहरी, मेहगांव, मुंगावली, बामोरी को छोड़कर 6 सीटें अंबाह, गोहद, डबरा, भांडेर, करैरा, अशोकनगर आरक्षित हैं। यहां बसपा का कोर वोटर भाजपा-कांग्रेस के समीकरण गड़बड़ाने की स्थिति में है। कांग्रेस विधायक बनवारी लाल शर्मा के निधन से खाली हुई मुरैना की जौरा सीट पर उपचुनाव के साथ बागी विधायकों की सीट पर भी चुनाव के आसार हैं।
बदले सियासी घटनाक्रम में किसी सीट पर प्रत्याशी उतरने का मन बनाती भी है तो भी जिस तरह अभी तक बसपा के दो विधायक सरकार के साथ खड़े हैं, कांग्रेस को उसे साधना मुश्किल नहीं होगा। इसीलिए अपने पाले में मुश्किल लग रही राज्यसभा सीट पर बरैया को उतारा गया है ताकि हार होने पर भी ग्वालियर चंबल संभाग में सिंधिया के कारण कमजोर हुई कांग्रेस को उपचुनाव में एक चेहरा मिल सके।


जौरा सीट से बसपा प्रत्याशी मनीराम धाकड़ को 41014, सुमावली से मानवेन्द्र सिंह गांधी को 31331, मुरैना से बलवीर डंडोतिया को 21149, दिमनी से छतर सिंह तोमर को 14401, अम्बाह से सत्यप्रकाश सिकरवार को 22179, गोहद से जगदीश सिंह सागर को 15477, डबरा से पीएस मंडेलिया को 13155, करैरा से प्रागीलाल जाटव को 40026, पोहरी से कैलाश कुशवाह को 52736 वोट मिले थे। मेहगांव से बरैया के बहुजन संघर्ष दल से लडे रंजीत सिंह गुर्जर को 28160 वोट मिले।

बागी विधायकों की सीटों पर बसपा के कोर वोटर की मजबूती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश के राजनीति में तीसरे धड़े की ज्यादा गुंजाइश न होने के बावजूद इन सीटों से बसपाई विधानसभा पहुंचते रहे हैं। बसपा के टिकट पर भांडेर से खुद फूल सिंह बरैया 1998 में विधायक रह चुके हैं।

गोहद से 1993 में चतुरीलाल, मेहगांव से नरेश सिंह, अम्बाह से सत्याप्रकाश, डबरा से जवाहर सिंह सहित एक साथ पांच विधायक ग्वालियर चंबल अंचल से रहे। 2003 में करैरा से लाखन सिंह यादव विधायक रहे वहीं जौरा सीट से 1998 में सोनेराम कुशवाह, 2008 में मनीराम धाकड़ विधायक रहे।

फूल सिंह बरैया लोकसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ के सामने अपने बहुजन संघर्ष दल के साथ कांग्रेस में शामिल हुए थे। इसमें भी दिग्वजय सिंह की भूमिका थी। उस समय भिंड-दतिया सीट से उन्हें प्रत्याशी बनाए जाने की भी चर्चा थी पर ऐन समय पर सवर्ण आंदोलन के दौरान दलित युवा नेता के रूप में सामने आए देवाशीष जरारिया को टिकट दे दिया गया। राज्यसभा टिकट देकर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह द्वारा किया गया वह वादा पूरा हो गया l