Random Posts

header ads
header ads

G News 24 : मर्जी के मुताबिक फैसला ना आने की आशंका,केजरीवाल & पार्टी ने जज को ही हटाने की मांग कर दी !

 और 'पहली बार किसी ने जज ने भी कहा मैं सुनवाईं से हट जाऊं',

मर्जी के मुताबिक फैसला ना आने की आशंका,केजरीवाल & पार्टी ने जज को ही हटाने की मांग कर दी !

दिल्ली हाईकोर्ट में दिल्ली की पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और बाकी की ओर से दायर की गई याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. इस दौरान अरविंद केजरीवाल ने अजीबोगरीब मांग करते हुए जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से खुद को अलग करने को कहा है. इसपर जस्टिस ने कहा कि  आज बहुत कुछ सीखने को मिला है. केजरीवाल & पार्टी द्वारा की गई इस प्रकार की मांग उनकी हटधर्मिता और हिटलर साही को उजागर करती है। ये मांग दर्शाती है कि ऐसे लोग चाहते हैं वे चाहे जितना बड़ा क्राइम करें लेकिन फैसला उनकी मर्जी के अनुसार ही होना चाहिए। उन्हें स्पेशल ट्रिटमेंट मिलना चाहिए क्योंकि वे नेता हैं। ऐसे लोगों के मन में संविधान और कानून के प्रति कोई सम्मान नहीं होता है और उन्होंने ये मांग रखकर यह भी साबित कर दिया कि इन्हें देश की न्याय व्यवस्था पर भी कोई भरोसा नहीं है ! आप याद करके बताएं कि क्या कभी किसी आम नागरिक ने अभी तक ऐसा किया है ! बहुत ही शर्मनाक है ! 

दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल, सिसोदिया और बाकी की ओर से दायर याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया है. केजरीवाल समेत बाकी लोगों ने मांग की है कि जस्टिस शर्मा इस सुनवाई से खुद को अलग कर ले. दरअसल, जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने आदेश सुरक्षित रखते हुए कहा कि मेरे सामने पहली बार ऐसा हो रहा है कि जब  किसी ने मुझसे मामले की सुनवाई से हटने की मांग की है. मुझे आज बहुत कुछ सीखने को मिला है. उम्मीद है कि मैं अच्छा फैसला दूंगी.

कोर्ट के सामने मामला क्या है...

सीबीआई ने दरअसल राऊज कोर्ट के उस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है जिसमें निचली अदालत ने केजरीवाल सिसोदिया समेत 23 लोगों को आरोप मुक्त कर दिया था. सीबीआई की यह अर्जी जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच के सामने पेंडिंग है. केजरीवाल समेत सीबीआई की ओर से इस केस में पहले आरोपी बनाए गए दूसरे लोग नहीं चाहते कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा इस मामले की सुनवाई करें  लिहाजा उन्होंने खुद जस्टिस शर्मा की बेंच के सामने अर्जी दायर कर मांग की है कि वह इस केस की सुनवाई से खुद को अलग कर ले. 

केजरीवाल ने खुद अपनी बात रखी...

इस मामले में दिलचस्प यह भी रहा कि आज खुद अरविंद केजरीवाल हाई कोर्ट पहुंचे और उन्होंने खुद अपनी बात रखी. करीब 1 घंटे तक रखी उनकी दलीलों को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने न  केवल धैर्यपूर्वक सुना बल्कि उन्हें साथ साथ लिखित में दर्ज भी किया. अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा के दिए गए कुछ पुराने फैसलों और कोर्ट के बाहर के उनके व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें इस बात की आशंका है कि अगर यही बेंच इस मामले की सुनवाई करती है तो ऐसी सूरत में निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं हो पाएगी और उन्हें इंसाफ नहीं मिल पाएगा.

केजरीवाल ने पुराने फैसलों का हवाला दिया...

केजरीवाल ने कहा कि आबकारी नीति से जुड़े पांच मामले इससे पहले जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा की बेंच के सामने आए थे जिसमें जमानत की मांग और गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली अर्जी शामिल थी. उन्होंने किसी मामले में कोई  राहत तो दी नहीं, साथ ही साथ इन अर्जियों पर सुनवाई करते हुए भी उन्होंने केस की मेरिट को टिप्पणियां कर दी. केजरीवाल ने उन टिप्पणियों के हवाला देते हुए कहा कि यह साबित  करती है कि जस्टिस स्वर्णकांता पहले ही केजरीवाल और बाकी को इस घोटाले का दोषी मान चुकी है. उन्होंने CBI और ED की ओर से पेश हर दलील को तरजीह देते हुए सही माना है.

'निचली अदालत के आदेश पर एकतरफा रोक लगाई'

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि निचली अदालत के जज ने बहुत विस्तार से सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद उन्हें आरोप मुक्त किया. जज ने यह फैसला दिया कि इस मामले में घोटाले या रिश्वत के कोई सबूत नहीं है. गोवा में पैसे ले जाने की भी कोई बात साबित नहीं हो पाई है.

केजरीवाल ने कहा कि CBI ने 500 पेज के निचली अदालत के फैसले के खिलाफ 4 घण्टे में  दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर कर दी. इतनी तेजी में बिना किसी तैयारी के दायर की गई यह याचिका ख़ारिज होनी चाहिए लेकिन हाई कोर्ट ने बिना हमारा पक्ष सुने 9 मार्च को इस आदेश के कुछ हिस्से पर रोक लगा दी. हाई कोर्ट ने एक तरफा आदेश पास करते हुए  सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ टिप्पणी पर रोक लगा दी. इसके साथ ही निचली अदालत में चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग के केस पर रोक लगा दी जबकि ED उस वक़्त पक्षकार तक नहीं थी.

केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता से कहा जब पहले यह मामला हाई कोर्ट में सुनवाई पर आया था. तब बेंच कहा था कि अप्रूवर के बयान को खारिज नहीं किया जा सकता. अब निचली अदालत ने अपने फैसले में जो गवाहों के बयान को लेकर कहा है, उस निष्कर्ष को 9 मार्च को बेंच पहली ही सुनवाई में ग़लत ठहरा दिया.

अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रम में शामिल होने पर सवाल...

केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकाता शर्मा के  अधिवक्ता परिषद के समारोह में 4 बार शामिल होने पर सवाल उठाया. केजरीवाल ने कहा  कि उस संगठन की विचारधारा मेरी विचारधारा के खिलाफ है. आप 4 बार उसमे शामिल हो चुकी है. मेरे खिलाफ केस भी राजनीतिक है. इससे मेरे मन मे शंका पैदा होती है कि मुझे इंसाफ नहीं मिल पाएगा.

जस्टिस शर्मा ने इस पर  केजरीवाल से पूछा कि मेरा सवाल है कि क्या मैने उस समारोह में  कोई राजनैतिक या किसी विचारधारा से जुड़ा बयान दिया या फिर वो कार्यक्रम सिर्फ कानूनी विषय तक सीमीत था. केजरीवाल ने इस पर जवाब दिया कि उस प्रोगाम में जाना ही मेरे मन मे शंका पैदा कर देता है.

अमित शाह के कथित बयान का हवाला...

केजरीवाल ने अमित शाह के बयान का भी हवाला दिया जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट में जाना ही होगा.केजरीवाल ने  कहा कि एक पुरानी परंपरा यह भी रही है कि जज के निकट सम्बन्धी अगर राजनीतिक पार्टी/ सत्तारूढ़ पार्टी  से जुड़े हो तो जज सुनवाई से अलग हो जाते है.  जस्टिस स्वर्णकांता इसे भी ध्यान में रखें.

आपने वकील से भी बेहतर बोला...

केजरीवाल ने अपनी बात पूरी कर जब कोर्ट से जाने की इजाज़त मांगी तो जस्टिस शर्मा ने हल्के अंदाज में कहा कि आपने एक वकील से भी बेहतर तरीके से अपनी बात रखी है.

गलत मिसाल बनेगी-SG मेहता

CBI की ओर से सॉलिसीटर जनरल  तुषार मेहता ने इस मांग जा  विरोध किया कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को इस मामले की सुनवाई से हट जाना चाहिए. एसजी तुषार मेहता ने कहा कि यह कहना बहुत आसान है कि यह मामला किसी दूसरे जज को दे दिया जाए. लेकिन इससे एक गलत मिसाल बनेगी. अगर केवल आरोप लगाकर या जज पर शक जताकर कोई पक्ष यह तय करने लगे कि उसका केस कौन-सा जज सुनेगा, तो फिर कोई भी जज ऐसे मामलों की सुनवाई नहीं कर पाएगा. कोर्ट को  प्रयासों को रोकना चाहिए जिनसे जज पर आरोप लगाकर माहौल बनाया जाए और अदालत पर दबाव डाला जाए.

केजरीवाल ने तथ्यों को छुपाया-SG

SG तुषार मेहता ने कहा कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने अरविंद केजरीवाल  की गिरफ्तारी को सही ठहराया गया था, उस “reason to believe” वाले आदेश को बाद में सुप्रीम कोयर्ट  ने भी बरकरार रखा. लेकिन यह बात केजरीवाल ने कोर्ट को नहीं बताई.

एसजी तुषार मेहता ने कहा कि  मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में जज को ज़मानत पर फैसला देते वक्त आरोपी के खिलाफ  केस की मेरिट पर अपनी राय देनी होती है.जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की टिप्पणियां भी इसी सन्दर्भ में थी.जहां तक मनीष सिसोदिया के केस का सवाल है, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इसलिए ज़मानत दी कि वो लंबे वक़्त से जेल में बंद थे. इसका मतलब यह नहीं कि वो इस बेंच के निष्कर्ष से सहमत नहीं था.

अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रम पर SG का जवाब

एसजी तुषार मेहता ने कहा कि अरविंद केजरीवाल का यह कहना कहना  कि चूंकि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने अधिवक्ता परिषद के एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था, लिहाजा उनकी निष्पक्षता पर उन्हें सन्देह है,एक बहुत ही अजीब और बचकाना तर्क है. किसी जज की व्यक्तिगत राजनीतिक सोच कुछ भी हो सकती है.उससे उन पर पक्षपाती होने का आरोप नहीं लग जाता. वैसे भी  अधिवक्ता परिषद एक बार एसोसिएशन है. अगर कोई बार एसोसिएशन किसी जज को कानून के विषय पर बोलने के लिए बुलाती है, तो क्या जज को मना कर देना चाहिए!

सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाई कोर्ट तक कई जज अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रमों में गए हैं और कानून के विषय पर बोले हैं.ऐसे में क्या केजरीवाल उन सभी जजों आदेश को ग़लत कहेंगे! हकीकत तो ये है कि जिन जजों ने उन्हें जमानत दी, उनमें से एक जज भी अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रम में शामिल हुए थे.

तुषार मेहता ने कहा कि कोर्ट को इस बात से फर्क नहीं पड़ना चाहिए कि सोशल मीडिया पर क्या चल रहा है, पब्लिक क्या कह रही है. इस तरह की मांग को सख्ती से खारिज कर देना चाहिए.



Post a Comment

0 Comments