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G News 24 : 'महिला आरक्षण' के परीसीमन बिल पर हार कर भी जीत गई BJP, '2029' का रास्ता हुआ साफ !

 संविधान में 131वां संशोधन विधेयक-2026 गिर गया,बिल के पक्ष में 298,जबकि विरोध में 230 वोट पड़े...

'महिला आरक्षण' के परीसीमन बिल पर हार कर भी जीत गई BJP, '2029' का रास्ता हुआ साफ ! 

बीजेपी लोकसभा में 'महिला आरक्षण' पर हार कर भी जीत गई क्या ? क्या उसने इस हार के जरिए भी अपनी '2029' में जीत का रास्ता साफ कर दिया है. आखिर राजनीतिक एक्सपर्ट ऐसा क्यों कह रहे हैं. मोदी सरकार की ओर से से महिला आरक्षण के लिए लोकसभा में पेश किया गया संविधान (131वां संशोधन) विधेयक-2026 गिर गया. प्रस्ताव के पक्ष में 298 सांसदों ने वोट दिए, जबकि विरोध में 230 वोट पड़े. विधेयक को पास होने के लिए दो-दिहाई बहुमत यानी कि करीब 352 वोटों की जरूरत थी. लेकिन इस जादुई आंकड़े तक न पहुंच पाने की वजह से लोकसभा में बिल गिर गया. 

बिल गिरने से विपक्ष गदगद, सत्ता पक्ष हैरान

यह बिल 2023 के नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने और लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने के लिए लाया गया था. बीजेपी सरकार इस विधेयक को महिलाओं को तत्काल 33% आरक्षण देने का कदम बता रही थी. वहीं, विपक्ष इसे ‘चुनावी नक्शा बदलने की साजिश’ करार देकर विरोध कर रहा था. अब इस बिल के पास होने पर जहां विपक्ष इसे अपनी बड़ी जीत के रूप में पेश कर रहा है. वहीं, सत्ता पक्ष हैरान है और वह इसे देश की आधी आबादी के साथ किया गया धोखा बता रहा है. 

सवाल है कि क्या बीजेपी ने बिल पास न होने के बावजूद राजनीति की बड़ी जंग जीत ली है? अगर राजनीतिक पंडितों के आकलन को सही माने तो इसका जवाब हां है. लोकसभा में बिल गिरने के बाद बीजेपी ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर भुनाने का बड़ा फैसला कर लिया है. उसने देशव्यापी अभियान चलाकर विपक्ष को ‘महिलाओं का दुश्मन’ साबित करने की रणनीति बनाई है. एनडीए ने तय किया गया है कि अब सड़क पर संघर्ष करके पूरे देश को विपक्ष की सच्चाई से अवगत कराया जाएगा.. 

हारकर भी जीत गई है बीजेपी !

बीजेपी का तर्क है कि 2023 का कानून तो पास हो चुका था, लेकिन विपक्ष ने संशोधन के जरिए इस कानून को तुरंत लागू करने का मौका खो दिया. ऐसा करके उसने देश की आधी आबादी यानी महिलाओं को उनका हक हासिल करने से वंचित कर दिया है.  विश्लेषक इस रणनीति को ‘हार में जीत’ की चाणक्य नीति बता रहे हैं. उनका कहना है कि महिला आरक्षण जैसा भावनात्मक मुद्दा अब बीजेपी के पास आ गया है. वह इसे महिलाओं के आत्मसम्मान से जोड़कर जोरदार चुनावी अभियान चला सकती है. उसे पश्चिम बंगाल में इसका बड़ा फायदा मिल सकता है. वह राज्य में इस मुद्दे को ‘विपक्ष ने महिलाओं को धोखा दिया’ के नारे के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है.

दूसरी ओर, विपक्ष का दावा है कि बिल दरअसल परिसीमन का जाल था. इसके जरिए दक्षिण भारत और विपक्षी राज्यों की सीटें आनुपातिक रूप से कम करके नुकसान पहुंचाने की साजिश रची जा रही थी. कांग्रेस, टीएमसी, सपा और डीएमके का तर्क दिया कि सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर सीटें बढ़ाने जा रही थी. ऐसा करने से उत्तरी राज्यों को ज्यादा फायदा होता, जबकि दक्षिणी राज्यों की भागीदारी घटती. राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने इसे ‘लोकतंत्र पर हमला’ बताया. लेकिन यही रुख विपक्ष के लिए दोधारी तलवार साबित हो सकता है. 

विपक्ष ने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है?

इसका जवाब हां के रूप में दिया जा सकता है. महिला आरक्षण देश की आधी आबादी का मुद्दा है. अब बिल गिरने के बाद बीजेपी देशभर में इसे ‘मोदी की गारंटी’ के रूप में प्रचारित करेगी. वह इस बात को जोर-शोर से उठा सकती है कि वह महिलाओं को उनका हक देने जा रही थी लेकिन विपक्षी नेताओं ने ऐसा करने से रोक दिया. अगर उसकी रणनीति कामयाब हुई तो विपक्ष को महिलाओं के विरोध का सामना करना पड़ सकता है. खासकर ग्रामीण और युवा महिलाओं में नाराजगी बढ़ सकती है, जो पहले से ही स्व-सहायता समूहों और योजनाओं से जुड़ी हैं.

विपक्ष को फायदा होगा या नुकसान? 

इस मुद्दे पर विपक्ष नुकसान उठा सकता है. विपक्ष ने बिल को ‘दिल्ली-दक्षिण बनाम उत्तर’ का मुद्दा बनाकर क्षेत्रीय असंतुलन पर जोर दिया था, लेकिन लोकसभा में यह बिल महिला आरक्षण विधेयक के नाम से पेश किया गया था. ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर यह मुद्दा विपक्ष की ‘महिला-विरोधी’ छवि बना सकता है. दक्षिण के राज्यों में भले ही बीजेपी की रणनीति ज्यादा सफल न हो, लेकिन उत्तर भारत, मध्य भारत और पूर्वी राज्यों में विपक्ष का महिला वोट बैंक गड़वड़ा हो सकता है. 

मोदी सरकार पहली ही लाडली बहना, उज्ज्वला जैसी योजनाओं के जरिए ‘महिला सशक्तिकरण’ को अपना ब्रांड बना चुकी है. पीएम मोदी अपने हरेक संबोधन में महिला को आगे बढ़ाने की बात करते हैं. ऐसे में अब उनके नेतृत्व में बीजेपी इस मुद्दे पर ज्यादा आक्रामक हो सकती है. पार्टी ने अपनी इस रणनीति का एलान भी कर दिया है. उसने आज शनिवार को देशभर में इस मुद्दे पर प्रदर्शन की घोषणा की है. इस प्रदर्शन में विभिन्न राज्यों में पार्टी कार्यकर्ता बाहर निकलकर विपक्ष के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे. साफ है कि वह अब इस बिल की ‘हार’ को ‘विपक्ष की साजिश’ में बदलने जा रही है.

विपक्ष पर चिपक सकता है ‘महिला आरक्षण का हत्यारा’ टैग

राजनीतिक पंडितों का कहना है कि यह घटना बीजेपी की रणनीतिक विजय साबित हो सकती है. संसद में संख्या बल की कमी के बावजूद उसने विपक्ष को नैतिक रूप से घेर लिया है. विपक्ष को अब न सिर्फ सदन में, बल्कि सड़क पर और चुनावी मैदान में महिलाओं के सवालों का जवाब देना होगा. अगर बीजेपी अपना अभियान प्रभावी ढंग से चला पाई और 2029 तक इस मुद्दे को जिंदा रख पाई तो अगले लोकसभा चुनाव में भी उसे बड़ा फायदा हो सकता है. इससे विपक्ष पर ‘महिला आरक्षण का हत्यारा’ टैग चिपक सकता है. अब देखना होगा कि क्या विपक्ष इस जाल से निकल पाएगा या बीजेपी की ‘हार में जीत’ वाली रणनीति 2029 का ट्रेंडसेटर बनेगी.

@ रामवीर सिंह यादव 

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