G News 24 : इजरायल से अब PM मोदी भारत ला रहे हैं ब्रह्मोस से भी ज्यादा तबाही मचाने वाला हथियार !

 इजरायल ने भारत को ऐसा हथियार देने का ऐलान किया है, जिसे उसने दुनिया से छिपाकर रखा था...

इजरायल से अब PM मोदी भारत ला रहे हैं ब्रह्मोस से भी ज्यादा तबाही मचाने वाला हथियार !

इजरायली संसद में बोले PM मोदी, नेतन्याहू ने कहा- 'आप एशिया के शेर'
PM मोदी के इजरायल पहुंचते ही हर पल चौंकाने वाली खबरें आ रही हैं. अब खबर है कि इजरायल ने भारत को ऐसा हथियार देने का ऐलान किया है, जिसे उसने दुनिया से छिपाकर रखा था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान एक बड़ी डिफेंस डील होने वाली है. दुनियाभर के देश इस हथियार की मांग करते रहे हैं, लेकिन इजरायल ने इसे सिर्फ भारत को देने का फैसला किया है. ये हथियार ब्रह्मोस मिसाइल से भी ज्यादा घातक बताया जा रहा है. इजरायल ने उस उर्दू शेर का एग्जाम्पल सेट किया है, जिसमें शायर कहता है, 'सारी दुनिया से किनारा करके, हमने रखा है खुद को फकत तुम्हारा करके'.अब बात हथियार की.

पीएम मोदी को स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल से सम्मानित किया गया
इजरायल की संसद में पीएम मोदी को स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल से सम्मानित किया गया. यह कनेसट का सर्वोच्च सम्मान है. भारत और इजरायल के बीच रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने में प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत नेतृत्व के जरिए किए गए असाधारण योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें यह पदक प्रदान किया जा रहा है. 
 हम 7 अक्टूबर के दर्द को महसूस करते हैं: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'मेरा जन्म उसी दिन हुआ था जिस दिन भारत ने औपचारिक रूप से इजरायल को मान्यता दी थी, 17 सितंबर, 1950 को. मैं 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा किए गए बर्बर आतंकवादी हमले में जान गंवाने वाले हर व्यक्ति और हर उस परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं, जिनका जीवन तबाह हो गया. हम आपके दर्द को महसूस करते हैं, हम आपके दुख में आपके साथ हैं. भारत इस समय और भविष्य में भी पूरी दृढ़ता के साथ इजरायल के साथ खड़ा है.'
गाजा पीस पहल पर क्या बोले पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से समर्थित गाजा पीस पहल को भारत ने अपना समर्थन दिया है. हमारा मानना ​​है कि इसमें फिलिस्तीन मुद्दे के समाधान सहित, इस क्षेत्र के सभी लोगों के लिए न्यायपूर्ण और स्थायी शांति का वादा निहित है. शांति का रास्ता हमेशा आसान नहीं होता, लेकिन भारत इस क्षेत्र में संवाद, शांति और स्थिरता के लिए आपके और विश्व के साथ खड़ा है.'

आखिर इजरायल का ये कौन सा हथियार है...

ये है 'गोल्डन होराइजन' नाम की एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल. ये फाइटर जेट्स जैसे सुखोई SU-30 MKI से लॉन्च की जा सकती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मिसाइल टर्मिनल फेज में मार्क 5 से ज्यादा स्पीड पकड़ लेती है. जबकि भारत की ब्रह्मोस मिसाइल की स्पीड मार्क 3 के आसपास है. इतनी तेज स्पीड की वजह से इसे इंटरसेप्ट करना लगभग नामुमकिन हो जाता है.

ब्रह्मोस से क्यों ज्यादा खतरनाक...

  1. टारगेट: ये गहरे बंकरों, मजबूत किले और यहां तक कि न्यूक्लियर फैसिलिटीज को भी भेद सकती है.
  2. रेंज: एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि इसकी रेंज 1,000 से 2,000 किलोमीटर तक हो सकती है, जो ब्रह्मोस (लगभग 800 किमी तक) से कहीं ज्यादा है.
  3. टारगेट एक्यूरेसी: ये मिसाइल हार्ड टारगेट्स को तबाह करने के लिए खासतौर पर बनाई गई है, जहां ब्रह्मोस जैसे क्रूज मिसाइल मुश्किल से पहुंच पाती हैं.

इजरायल ने क्यों सिर्फ भारत को चुना...

इजरायल ने इस एडवांस्ड टेक्नोलॉजी को किसी और देश के साथ शेयर नहीं किया. दुनिया भर से मांग आई, लेकिन इजरायल ने भारत को प्राथमिकता दी. ये दोनों देशों के बीच बढ़ती मजबूत डिफेंस पार्टनरशिप का नतीजा है. PM मोदी ने इजरायल की संसद में कहा था, ‘आज की अनिश्चित दुनिया में भारत और इजरायल जैसे भरोसेमंद पार्टनर्स के बीच मजबूत रक्षा साझेदारी बहुत जरूरी है.’

PM मोदी की इस यात्रा के दौरान इजरायल के साथ कई बड़े करार हो सकते हैं. इनमें शामिल हैं-

  • डेविड्स स्लिंग: 300 किलोमीटर तक मिसाइल और ड्रोन रोकने वाला सिस्टम.
  • आयरन बीम: लेजर बेस्ड डिफेंस, जहां हर शॉट की कीमत सिर्फ 2 डॉलर है. बहुत सस्ता और असरदार.
  • रैम्पेज एयर-टू-ग्राउंड मिसाइल: ‘आइस ब्रेकर' नेवल क्रूज मिसाइल और 'एयर लोरा' सुपरसोनिक मिसाइल.
  • भारत अपनी मल्टी-लेयर्ड मिसाइल शील्ड 'सुदर्शन चक्र' को 2035 तक पूरा करने की प्लानिंग कर रहा है. इसमें रूसी S-400, इजरायली बाराक और घरेलू आकाश सिस्टम पहले से शामिल हैं. ये नई डील्स भारत की 15,106 किलोमीटर लैंड बॉर्डर और 7,516 किमी कोस्टलाइन को और मजबूत बनाएंगी.

ये डील भारत-इजरायल के बीच नई सिक्योरिटी एलायंस 'हेक्सागन ऑफ एलायंसेज' की तरफ इशारा करती है. इसमें भारत, अरब-अफ्रीकी देश, ग्रीस, साइप्रस और एशियाई देश शामिल हो सकते हैं. ये रेडिकल फोर्सेस और अस्थिरता के खिलाफ मजबूत कदम होगा.


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