इसे कहते है मोदी और अमित शाह का मास्टरस्ट्रोक...
कॉकरोच एंड पार्टी का खेल शुरू होने से पहले ही 'नॉकआउट' इसे कहते हैं असली क्रोनोलॉजी !
दिल्ली के जंतर मंतर से 'दीपक कॉकरोच' और उसकी पूरी वामपंथी टोली AISA, जेएनयू के चुनिंदा एजेंडाधारी, PFI मानसिकता वाले लोग और कुछ कथित एक्टिविस्ट्स दिल्ली में एक बड़ा ड्रामा करने की फिराक में थे प्लान बड़ा सिंपल था पार्लियामेंट्री पुलिस स्टेशन जाओ, बिना परमिशन के हंगामा करो, पुलिस को उकसाओ, लाठीचार्ज करवाओ, विक्टिम कार्ड खेलो और फिर Gen-Z युवाओं को भड़काकर पूरे देश में बांग्लादेश और नेपाल जैसी अराजकता फैला दो...!!
गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस ने वो किया जिसकी उम्मीद इन आंदोलनजीवियों को सपने में भी नहीं थी पुलिस स्टेशन पर हंगामा करने का मौका ही नहीं दिया कॉकरोच के मांगने से पहले ही जंतर-मंतर पर 'शांतिपूर्ण प्रदर्शन' का परमिशन लेटर NoC उनके हाथ में थमा दिया!
जंतर-मंतर पर बिछाया अभेद्य जाल भारी पुलिस फोर्स और चारों तरफ ड्रोन तैनात सादे कपड़ों में पुलिस फोटोग्राफर्स और बॉडी कैम से लैस जवानbयानी हर चेहरे का डिजिटल हिसाब दिल्ली के बॉर्डर सील और मेट्रो पर कड़ी निगरानी अब अगर किसी ने एक पत्थर भी उठाया, तो सीधे सलाखों के पीछे जाने की पूरी तैयारी थी...!!
जब हंगामा करने का ग्राउंड ही नहीं मिला, तो पेड भीड़ भी बिखर गई भारत का असली Gen-Z युवा इतना बेवकूफ नहीं है कि अपना करियर छोड़कर इनके एजेंडे का हिस्सा बने दोपहर होते-होते मीडिया ने भी फुटेज देना बंद कर दिया और आंदोलन अपनी 'स्वाभाविक मौत' मर गया भारत को अस्थिर करने का सपना देखने वाले जोकरों के लिए 6 कड़े सबक
1. यह भारत है बॉस! यहाँ मोदी सरकार है, नेपाल या बांग्लादेश नहीं।
2. गृह मंत्री अमित शाह हैं, जो स्क्रिप्ट लिखने वालों की स्क्रिप्ट बदल देते हैं।
3. हमारी इंटेलिजेंस एजेंसियां साइकोलॉजिकल वॉरफेयर में उस्ताद हैं।
4. देश का असली युवा (Gen-Z) समझदार है, वो राष्ट्र निर्माण और अपने करियर पर ध्यान दे रहा है, अशांति पर नहीं।
5. विपक्ष और उसके पुराने चमचों की दुकान अब युवा पहचान चुके हैं।
6. देश का भरोसा देश के नेतृत्व पर अडिग है।
टेंट उखड़ गया, सर्कस खत्म! अब चलिए अगले मुद्दे पर चलते हैं।


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